
संशोधन नहीं लाते तो संसद वक्फ की होती-रिजिजू
मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड का ऐलान- देशभर में विरोध करेंगे
नई दिल्ली। अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री किरेन रिजिजू ने बुधवार को वक्फ संशोधन बिल 2024 लोकसभा में पेश किया। सुबह 12 बजे से बिल पर 8 घंटे की चर्चा शुरू हुई। बिल के जरिए वक्फ बोर्ड की संपत्तियों को कानूनी दायरे में लाए जाने का प्रस्ताव है। बिल पर चर्चा में रिजिजू ने 58 मिनट अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के नेतृत्व वाली क्क्र सरकार ने 5 मार्च 2014 को 123 प्राइम प्रॉपर्टी को दिल्ली वक्फ बोर्ड को ट्रांसफर कर दीं। ऐसा लोकसभा चुनाव से ठीक पहले अल्पसंख्यक वोटों के लिए किया गया, पर चुनाव हार गए।
रिजिजू ने कहा- अगर हमने आज यह संशोधन बिल पेश नहीं किया होता, तो जिस इमारत में हम बैठे हैं, उस पर भी वक्फ संपत्ति होने का दावा किया जा सकता था। अगर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार सत्ता में नहीं आती तो कई अन्य संपत्तियां भी गैर-अधिसूचित हो गई होतीं। इसके बाद विपक्ष की ओर से कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई आए। उन्होंने कहा- केंद्रीय मंत्री रिजिजू ने 5 मार्च 2014 को 123 प्राइम प्रॉपर्टी को दिल्ली वक्फ बोर्ड को ट्रांसफर करने का दावा किया। वह पूरा का पूरा मिसलीड है, झूठ है। बिल संविधान के मूल ढांचे पर आक्रमण है।
मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड बोला- बिल पास हुआ तो देशभर में आंदोलन करेंगे
ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (्रढ्ढरूक्करुक्च) ने बिल पर अपनी कड़ी आपत्ति जताई है। ्रढ्ढरूक्करुक्च के प्रवक्ता डॉ. सैयद कासिम रसूल इलियास ने बिल की निंदा करते हुए कहा, अगर यह बिल संसद में पास हो जाता है, तो हम इसके खिलाफ देशव्यापी आंदोलन शुरू करेंगे। हम चुप नहीं बैठेंगे। हम अपने पास उपलब्ध सभी कानूनी और संवैधानिक प्रावधानों का उपयोग करेंगे। जब तक प्रस्तावित संशोधन वापस नहीं लिए जाते, हम शांतिपूर्ण आंदोलन चलाएंगे। बिल भेदभावपूर्ण और सांप्रदायिक रूप से प्रेरित है।
रविशंकर बोले- कल वक्फ कहेगा, पूरा हिंदुस्तान हमारा, ऐसे नहीं चलेगा
रविशंकर प्रसाद ने कहा कि वक्फ की 8 लाख संपत्ति हैं। दुनिया की सबसे बड़ी संपत्ति हैं। मुतवल्ली उन्हें मैनेज करता है। उसकी जिम्मेदारी होती है कि नहीं। पटना का सांसद हूं। एक सरकारी जमीन का तालाब है, जहां छठ पर अर्घ्य दिया जाता है। हाईकोर्ट ने कहा कि यह सरकारी जमीन है। 1920 का एक कब्रिस्तान खड़ा है और कहते हैं कि वक्फ की जमीन है। आगे कहेंगे कि पूरा हिंदुस्तान वक्फ है। कहेंगे कि हमारे सम्राट हुए थे। यह देश ऐसे नहीं चलेगा। वक्फ का दावा करने वाले कौन थे। मैनेजर साहब की बिल्डर से साठगांठ हो गई और इमारत खड़ी हो जाती है। बदलाव जरूरी है। जब वक्फ की संपत्ति की लूट हो तो हमें शांत रहना चाहिए। हाईकोर्ट के पास सीधा अधिकार नहीं था। वक्फ में हाईकोर्ट जाना मना था। आज आप कोर्ट में भी जा सकते हैं। ट्रिब्यूनल ठीकठाक चलना चाहिए। सेटिंग ना हो। आज क्रिश्चियन समाज क्यों दुखी है, वो चाहते हैं कि वक्फ में बदलाव हो। चर्च अतिक्रमण से परेशान हैं। जिस तरह से यूपी में क्रिश्चियन परेशान हैं, अखिलेश जी आपको भी सोचना पड़ेगा।
रविशंकर बोले- विपक्ष की मंशा वोटों में इजाफा करने की
भाजपा सांसद रविशंकर प्रसाद बोले- जब मोहम्मद शमी दूसरी टीम का खिलाड़ी आउट करता है तो पूरा देश खुश होता है। सानिया मिर्जा जीतती है तो पूरा देश खुश होता है। हम सोचते थे कि वोटों की सौदागरी बंद होगी। समय बदल रहा है। देखिए आज कांग्रेस कहां थी और कहां चली गई। राजीव गांधी को 400 सीट मिली और शाहबानों में वे झुक गए। उसके बाद आज तक कांग्रेस को बहुमत नहीं मिला। देश की हवा कहां चल रही है, आप समझिए। मोदी जी को एक बार बहुमत मिला, दूसरी बार बहुमत मिला। तीसरी बार लोगों ने जिता दिया, दिल्ली भी जिता दिया और अब बिहार भी जीतेंगे। आजादी के बाद 1954 में एक्ट आया। 1959, 1963, 1984 में बदलाव हुआ। 1995 तब बदलाव हुआ, जब राम जन्मभूमि का मसला था। 2013 का कब आया, जब ये हारने वाले थे। आपकी मंशा अपने वोट का इजाफा करने की है।
रविशंकर बोले- विपक्ष फिर गुमराह करने के लिए हल्ला मचा रहा
रविशंकर प्रसाद ने कहा- 2014 में जब हमारी सरकार आई तो पीएम मोदी जी ने कहा कि जाओ कोर्ट के बाहर खड़े हो जाओ और कहो कि हमारी सरकार ये कानून खत्म करने के लिए खड़ी है। 370 की धारा हटाई। गृह मंत्री ने हिम्मत दिखाई ना। देश जल जाएगा, ऐसी बात कही जा रही थी। आज धारा 370 खत्म हो गई। इन्वेस्टमेंट आ रहा है। चुनाव हुआ तो एक भी हिंसा की घटना नहीं हुई। जहां पाकिस्तान के झंडे लहराते थे, वहां तिरंगा लहरा रहा है। भारत माता की जय बोली जा रही है। वोट बैंक के लिए देश कहां तक जाएगा, क्यों जाना चाहिए। ष्ट्र्र पर क्या तूफान खड़ा किया गया। इसका कोई असर हिंदुस्तान के मुसलमानों पर नहीं पड़ा। आज फिर गुमराह करने के लिए हल्ला मचा रहे हैं।
रविशंकर बोले- कांग्रेस ने शाहबानो मामले में सुप्रीम कोर्ट का फैसला पलटा
रविशंकर प्रसाद ने सदन में कहा- वक्फ की प्रॉपर्टी पर कितने स्कूल खुले, कितने अनाथालय बने, कितने सिलाई केंद्र बने, यह सवाल है। आज वक्फ की प्रॉपर्टी की फंडिंग बढ़ाने और उनके समाज को आगे बढ़ाने के लिए कुछ हो रहा है तो इन्हें क्या परेशानी है। दिल से तो कह रहे हैं कि सुधार हो, लेकिन राजनीतिक इच्छा इन्हें रोकती है। मैं 3 उदाहरण दूंगा। शाहबानो के केस में सुप्रीम कोर्ट ने फैसला दिया कि शाहबानो को मुआवजा दिया जाए, तो हल्ला मचा, तब राजीव गांधी पीएम थे। बहुमत था। आरिफ मोहम्मद खान सरकार में मंत्री थे। 2 दिन ऐतिहासिक भाषण हुआ। राजीव गांधी ने उन्हें बुलाया कि सुप्रीम कोर्ट का फैसला बदलने के लिए कानून ला रहे हैं। तीन तलाक पर फैसला आया। 2 साल तक इनकी सरकार ने सुप्रीम कोर्ट ने जवाब नहीं फाइल किया, ताकि फैसला अटका रहे।
रविशंकर प्रसाद बोले- मुतवल्ली ट्रस्ट के मैनेजर, मालिक नहीं
भाजपा सांसद रविशंकर प्रसाद ने कहा- मैं विपक्ष की बात सुन रहा था, कह रहे थे। वक्फ बिल में संशोधन होना चाहिए, लेकिन नहीं भी होना चाहिए। ये कैसे हो सकता है। जब भी संविधान की बात आती है तो आजकल एक लाल किताब चल रही है। हम संविधान की हरी किताब लेकर आए हैं। संविधान में लिखा है कि महिलाओं के विकास के लिए सरकार कानून बनाया जा सकता है। संविधान की दुहाई का जवाब में संविधान से ही दे रहा हूं। महिलाओं के लिए संशोधन किया जा रहा है तो यह बिल असंवैधानिक कैसे है? मैं बिहार से आता हूं, वहां बहुत सारे पिछड़े मुसलमान हैं। यूपी में भी हैं। उन्हें वक्फ के मैनेजमेंट का मौका नहीं मिलता। इस बिल में इसका जिक्र है कि वक्फ में पिछड़े मुसलमानों को जगह दी जाएगी तो इन्हें परेशानी क्यों है? वक्फ में परिवर्तन मौलिक अधिकारों के धारा 15 के तहत ही की जा रही है। वक्फ के मायने क्या हैं? वक्फ कोई धार्मिक संस्था नहीं है, यह सिर्फ वैधानिक संस्था है। मुतवल्ली को सिर्फ मैनेजर बोलते हैं। एक किताब है मुस्लिम लॉ पर। इसका एक पैराग्राफ है- मुतवल्ली के पास वक्फ की प्रॉपर्टी का अधिकार नहीं है, उसका सिर्फ मैनेजर हैं। वे ट्रस्ट के मालिक नहीं हैं।
गोगोई बोले- छ्वक्कष्ट में कुछ लोग ऐसे भी थे, जिन्हें वक्फ की जानकारी नहीं थी
गोगोई ने कहा कि ये (सरकार) छ्वक्कष्ट की बात करते हैं कि विस्तार से चर्चा हुई। उसमें ऐसे लोग भी आए थे, जिन्हें वक्फ की जानकारी भी नहीं थी। हमने पत्र लिखकर इसके बारे में बताया था। इनके कुछ दोस्तों को सलाह देना चाहता हूं- लिमिटेशन एक्ट हटा दिया है। आंध्र प्रदेश में ये एक्ट ऑलरेडी था, जिसे हटाया जा रहा है। आंध्र के इनके साथियों को उसका जवाब देना पड़ेगा।
गोगोई बोले- राज्य सरकार की ताकत खत्म करने की कोशिश हो रही
गौरव गोगोई ने कहा कि आज एक विशेष समाज की जमीन पर इनकी नजर है, कल समाज के दूसरे अल्पसंख्यकों की जमीन पर इनकी नजर जाएगी। संशोधन की जरूरत है। मैं यह नहीं कहता कि संशोधन नहीं होना चाहिए। संशोधन ऐसा होना चाहिए कि बिल ताकतवर बने। इनके संशोधनों से समस्याएं और विवाद बढ़ेंगे। ये चाहते हैं कि देश के कोने-कोने में केस चलें। ये देश में भाईचारे का वातावरण तोडऩा चाहते हैं। बोर्ड राज्य सरकार की अनुमति से कुछ नियम बना सकते हैं। ये पूरी तरह से उसे हटाना चाहते हैं। राज्य सरकार की पावर खत्म करने की कोशिश कर रहे हैं। नियम बनाने की ताकत राज्य सरकार को है। राज्य सरकार सर्वे कमिश्नर के पक्ष में नियम बना सकती है। आप सब हटाना चाहते हैं और कह रहे हैं कि ये संशोधन हैं। आप कह रहे हैं कि ट्रिब्यूनल के आदेश के बाद हाईकोर्ट के कोई मायने नहीं है। पहले ही कहा गया है कि हाईकोर्ट किसी भी फैसले पर विचार कर सकता है और उसे बदल सकता है। कहीं नाइंसाफी हो तो केंद्र के पास अधिकार है कि राज्य के बोर्ड को आप निर्देश दे सकते हैं। ये सब पहले से ही है।
गोगोई बोले- ये भ्रम फैला रहे कि मौजूदा कानून महिलाओं के खिलाफ
गोगोई के मुताबिक आज ये (सरकार) कहना चाहते हैं कि 5 साल तक इस्लाम मानने वाला ही वक्फ क्रिएट करता है। पहले था कि कोई भी व्यक्ति वक्फ बना सकता है, यही तो हमारा सेक्युलर ढांचा है। 2 महिलाएं वक्फ बोर्ड में होनी चाहिए। यह पहले भी था। 2 से ज्यादा महिलाएं भी हो सकती थीं। विधवा, तलाकशुदा का जिक्र किया, ये पहले भी था। इन्हें भ्रम फैलाना है कि वर्तमान एक्ट महिलाओं के खिलाफ है। वक्फ कानून में पहले से ही यह कानून है। पहले 7प्रतिशत रेवेन्यू था और आज इन्होंने 5प्रतिशत कर दिया। क्या आप नहीं चाहते कि वक्फ बोर्ड सही तरह से चले। उसका आधुनिकीकरण हो। आप चाहते हैं वक्फ बोर्ड और ट्रब्यूनल और कमजोर हो। इसलिए वक्फ के रेवेन्यू का प्रतिशत घटा दिया। हमारा सुझाव है कि इस रेवेन्यू को बढ़ाकर 11प्रतिशत कर दीजिए।
गोगोई ने कहा- क्या ये दूसरे धर्मों से सर्टिफिकेट मांगेंगे
लोकसभा में उपनेता प्रतिपक्ष गौरव गोगोई बोले कि पहले भी मंत्री जी ने कहा था कि बिल लाने से पहले विस्तार से चर्चा हुई है। यह गुमराह करने वाला बयान है। सरकार को जो 5 मीटिंग हुई हैं, उसका ब्योरा दें। एक भी मीटिंग में इस बात का जिक्र भी नहीं हुआ कि नया वक्फ बिल चाहिए। सिर्फ पोर्टल को लेकर विचार हुआ। एक भी मीटिंग में नया वक्फ बिल चाहिए, इसका जिक्र तक नहीं हुआ। 2023 तक मिनिस्ट्री ने नए बिल पर विचार ही नहीं किया तो ये बिल कहां से आया। ये बात करते हैं कि संविधान के पक्ष में हैं। मैं कहना चाहता हूं कि बिल कहता है कि कोई भी व्यक्ति इस्लाम मानने वाला हो। वो दिखाता हो और उसकी प्रैक्टिस (धर्म का पालन) करता हो, वह वक्फ क्रिएट कर सकता है। क्या ये दूसरे धर्मों से सर्टिफिकेट मांगेंगे। ये क्यों धर्म को खींच रहे हैं कि आप इस धर्म को मानते हो, उसका सबूत दो।
गौरव गोगोई बोले- यह बिल संविधान के मूल ढांचे पर आक्रमण
कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने कहा- इन्होंने 2013 में यूपीए सरकार के विषय में कहा, वह पूरा का पूरा मिसलीड है, झूठ है। इन्होंने आरोप लगाए, भ्रम फैलाया। मेरा भी सौभाग्य है कि पिछले सदन में मैंने अयोध्या राम मंदिर पर अपनी पार्टी का पक्ष रखा। आज वक्फ बिल पर विपक्ष की तरफ से अपना पक्ष रख रहा हूं। दोनों मामलों में एक ही मार्गदर्शक है। भारत का संविधान।
संविधान कहता है कि सभी को सामाजिक, धार्मिक और रातनीतिक न्याय और समानता मिले। बिल संविधान के मूल ढांचे पर आक्रमण है। मंत्रीजी का पूरा भाषण संघीय ढांचे पर आक्रमण है। इस सरकार का इस बिल के द्वारा 4 मकसद हैं। संविधान को कमजोर करना, भ्रम फैलाना और अल्पसंख्यकों को बदनाम करना, भारतीय समाज को बांटना और चौथा मकसद अल्पसंख्यकों को डिसएन्फ्रेंचाइज करना।
कुछ हफ्ते पहले देश में लोगों ने ईद की शुभकामनाएं दीं। इनकी डबल इंजन सरकार ने लोगों को सड़क पर नमाज नहीं पढऩे दी।
रिजिजू ने कहा- आप जिद पर अड़े रहे तो नुकसान होगा
रिजिजू ने कहा कि वक्फ बोर्ड किसी भी जमीन को वक्फ प्रॉपर्टी डिक्लेयर कर देता था। इस प्रावधान को हटा दिया गया है। किसी गरीब की जमीन अब नहीं जाएगी। इस प्रावधान का बहुत गलत इस्तेमाल हुआ। आज हमारे पूरे देश की क्रिश्चियन कमेटी पुकार-पुकार के कह रही है कि वक्फ संशोधन बिल पास होना चाहिए। इसलिए कह रहा है कि वक्फ के सेक्शन 40 का बहुत गलत इस्तेमाल हो रहा था। मैं मानता हूं कि अभी भी आप जिद पर अड़े रहे, राजनीतिकरण पर डटे रहे तो नुकसान होगा। कांग्रेस के लिए कहना चाहता हूं। दूसरे लोग भी उनके चक्कर में न पड़ें।
रिजिजू ने कहा- आदिवासी इलाके में वक्फ प्रॉपर्टी क्रिएट नहीं कर सकेंगे
रिजिजू ने कहा कि कलेक्टर से ऊपर कोई भी अधिकारी सरकारी जमीन और किसी विवादित जमीन का विवाद देखेगा। जब वक्फ प्रॉपर्टी क्रिएट करेंगे तो किसी आदिवासी एरिया में जाकर नहीं कर सकते। यह बदलाव अहम है। वक्फ ट्रिब्यूनल में 3 मेंबर होंगे। इसके केस जल्द खत्म किए जाएं। इनका कार्यकाल होगा। अगर वक्फ के ट्रिब्यूनल के फैसले से खुश नहीं हैं तो अदालत जा सकते हैं।
रिजिजू बोले- वक्फ संशोधन बिल प्रॉपर्टी छीनने का कानून नहीं
किरेन रिजिजू ने कहा कि मुसलमानों में भी जो वक्फ के अंदर अपनी प्रॉपर्टी को गवर्न करना (चलाना) चाहते हैं तो उनका स्वागत है। अगर ट्रस्ट के जरिए अपनी प्रॉपर्टी का मैनेजमेंट करना चाहते हैं तो उन्हें इजाजत है। आपके ट्रस्ट को चैरिटी कमिश्नर चलाता है। आप कैसे कह सकते हैं कि कमिश्नर मेरी जाति का होना चाहिए। इसी तरह वक्फ बोर्ड में सिर्फ मुस्लिम रहेंगे, ये कैसे कह सकते हैं। इसका धार्मिक व्यवस्था से कुछ लेना-देना नहीं है। 2013 के बाद हमने कुछ बदलाव किए थे। कुछ ने शंकाएं जताई थीं। कुछ ने कहा कि सरकार मस्जिद-दरगाह छीन लेगी। मुसलमानों की प्रॉपर्टी छीन लेंगे। हम किसी न किसी राज्य से आते हैं। ये राज्य सरकार को हमने अथॉरिटी दी है। जो प्रॉपर्टी रजिस्टर्ड हो चुकी है, जहां आप नमाज पढ़ते हैं, उस पर कोई दखलंदाजी नहीं होगी। ये किसी के अधिकारों का हनन कर प्रॉपर्टी छीनने का कानून नहीं है। कोर्ट में जिन प्रॉपर्टी पर विवाद चल रहा है, उस पर भी कुछ नहीं होगा। देश में ष्ट्र्र लागू हो गया है। किसी मुसलमान की नागरिकता छीनी गई, बताइए। आपने देशभर में घूम-घूमकर झूठ बोला। आज फिर लोगों को गुमराह करेंगे तो फिर मुंह की खानी पड़ेगी। परिवार में पुरुष और महिला होते हैं। कोई भी मुसलमान जब वक्फ क्रिएट करता है तो सबसे पहले महिला का अधिकार सुरक्षित करना होगा। पहले वक्फ बना दिया और बच्चों-महिलाओं का अधिकार खत्म कर दिया जाता था। आप सिर्फ अपने 100त्न अधिकार वाली प्रॉपर्टी को वक्फ बना सकते हैं।
गरीब मुसलमान कह रहे, बिल जल्दी पास करें
रिजिजू के मुताबिक मुस्लिम डेलिगेशन मेरे घर आ रहे हैं, इस बिल का स्वागत कर रहे हैं। गरीब मुसलमान तो बार-बार कह रहे हैं कि इस बिल को जल्दी पास कीजिए। सेंट्रलाइज डेटा बेस होगा, वेबसाइट होगी। ट्रैकिंग होगी, काम वक्त पर होगा, करेक्शन करेंगे, ऑडिट भी होगा। ये हमने राज्य सरकार पर छोड़ा है। लैंड (जमीन) राज्य का विषय है। राज्य सरकारों को पूरी अथॉरिटी मिलेगी। मंत्रालय हमेशा ऑनलाइन जुड़े रहेंगे। राज्य सरकारें ही पूरी तरह से इसकी निगरानी का काम करेंगी। वक्फ धार्मिक, चैरिटेबल मकसद के लिए बनाया जाता है। इसे देखेंगे। इनकम हो रही है कि नहीं, यह भी देखेंगे। जो रिफॉर्म हम लाए हैं, जो बदलाव हमने आपको संक्षिप्त में बताए हैं। अगर आपको लगता है कि हमें इनकम जनरेशन करने के लिए क्या करना चाहिए तो आपके सुझावों का पूरे दिल से स्वागत करेंगे।
इस वक्त देश में 8.72 लाख वक्फ प्रॉपर्टी
रिजिजू ने लोकसभा में बताया कि 8.72 लाख वक्फ प्रॉपर्टी इस वक्त देश में है। इसका अगर हम सही से इस्तेमाल करें तो मुसलमान ही नहीं, देश की तकदीर बदल जाएगी। मैं जम्मू-कश्मीर गया था, वक्फ बोर्ड चेयरपर्सन एक महिला बनीं। उन्होंने कहा कि पहले इनकम की व्यवस्था, उसके रिकॉर्ड की कोई व्यवस्था नहीं थी। उनके आने के बाद 40 करोड़ इनकम हुई। हजरतबल दरगाह में मरम्मत और नवीनीकरण का काम भी चल रहा है। वक्फ अमेंडमेंट बिल में कई संशोधन रिकमंड हुए, उन्हें हमने बिल में शामिल किया। पार्लियामेंट्री कमेटी के बीच कई मुद्दे होते हैं। सुझाव छोटा भी हो तो हमने शामिल किया है। ये सारी व्यवस्था देखने के बाद सबके मन में उम्मीद जागेगी। नया सवेरा आने वाला है। ये उम्मीद इसलिए है कि यूनिफाइड वक्फ मैनेजमेंट रजिस्ट्रेशन से लेकर सर्वे और कलेक्टर के रोल तक मिलाकर मैनेजमेंट का सिस्टम बदलने का काम किया है। सशक्तिकरण कैसे आएगा। मुसलमानों में भी शिया, सुन्नी, बोहरा और पसमांदा के अलावा महिलाओं और बच्चों के लिए हमारे प्रावधानों का पूरी कम्युनिटी स्वागत कर रही है।
रिजिजू बोले- 2006 में देश में 4.9 लाख वक्फ प्रॉपर्टी थी
किरेन रिजिजू ने कहा कि देश में इतनी वक्फ प्रॉपर्टी है तो इसे बेकार में पड़ा नहीं रहने देंगे। गरीब मुसलमानों और बाकी मुसलमानों के लिए इसका इस्तेमाल किया ही जाना चाहिए। हमने रिकॉर्ड देखा है। सच्चर कमेटी ने भी इसका डिटेल में जिक्र किया है। 2006 में 4.9 लाख वक्फ प्रॉपर्टी थी। इनकी टोटल इनकम 163 करोड़ इनकम थी। 2013 में बदलाव करने के बाद जो इनकम बढ़कर 166 करोड़ हुई। 10 साल के बाद भी 3 करोड़ बढ़ी थी। हम इसे मंजूर नहीं कर सकते।
रिजिजू बोले- किसने बिल का विरोध किया और किसने समर्थन, देश याद रखेगा
रिजिजू ने कहा कि वक्फ के पास तीसरा सबसे बड़ा लैंड बैंक है। रेलवे, मिलिट्री की जमीन हैं। ये सब देश की प्रॉपर्टी है। वक्फ की संपत्ति, प्राइवेट प्रॉपर्टी है। दुनिया में सबसे ज्यादा वक्फ प्रॉपर्टी हमारे देश में है। 60 साल आप सरकार में रहे, फिर भी मुसलमान इतना गरीब क्यों है? उनके लिए क्यों काम नहीं हुआ? गरीबों का उत्थान, उनकी भलाई के लिए काम क्यों नहीं हुए? हमारी सरकार गरीब मुसलमानों के लिए काम कर रही है तो इसमें क्या आपत्ति है? आप लोग जो इस बिल का विरोध कर रहे हैं, देश सदियों तक याद रखेगा कि किसने बिल का समर्थन किया और किसने विरोध किया। आप लोग मुसलमानों को कितना गुमराह करेंगे?
हम वक्फ बोर्ड को सेक्युलर बनाना चाहते हैं- रिजिजू
किरेन रिजिजू ने कहा कि 2013 में इलेक्शन में कुछ ही दिन बचे थे। 5 मार्च 2014 को 123 प्राइम प्रॉपर्टी को दिल्ली वक्फ बोर्ड को ट्रांसफर कर दीं। चुनाव में कुछ दिन चुनाव में बाकी थे, आप इंतजार करते। आपने सोचा कि वोट मिलेंगे, लेकिन आप चुनाव हार गए। आपने कहा था कि कोई भी भारतीय वक्फ क्रिएट कर सकता है। इस बात को हमने फिर से रिवाइव कर दिया है कि वक्फ वही क्लेम कर सकता है, जो कम से कम 5 साल इस्लाम धर्म को मानता है। वक्फ बोर्ड को सेक्युलर बनाना चाहते हैं। अब वक्फ में शिया भी रहेंगे, सुन्नी भी रहेंगे, बोहरा भी रहेंगे, मुस्लिम बैकवर्ड क्लास भी रहेगा, एक्सपर्ट नॉन मुस्लिम रहेंगे, महिलाएं भी रहेंगी। वक्फ बोर्ड के मेंबर 4 नॉन मुस्लिम हो सकते हैं, 2 महिलाएं होनी ही चाहिए।
मस्जिद के मैनेजमेंट में दखलंदाजी का प्रावधान नहीं कर रहे- रिजिजू
रिजिजू ने कहा कि किसी भी तरीके से वक्फ बोर्ड वक्फ प्रॉपर्टी को मैनेज नहीं करता। सबको बोलने का मौका मिलेगा, आप लोग पहले शांति से बात तो सुन लीजिए। कुछ केस आपको बताना चाहता हूं। संविधान कहता है कि न तो सरकार किसी भी धार्मिक व्यवस्था में दखलंदाजी कर सकती है, न ही वक्फ किसी भी धार्मिक व्यवस्था में हाथ डाल सकता है। ये लोग संविधान को ही नहीं मानते। हम किसी भी मस्जिद के मैनेजमेंट में दखलंदाजी का प्रावधान नहीं कर रहे हैं। वक्फ बोर्ड का प्रावधान किसी मस्जिद-मंदिर की धार्मिक व्यवस्था से लेना-देना नहीं है, सिर्फ प्रॉपर्टी के मैनेजमेंट का मसला है।
रिजिजू ने कहा- पहले संसद की बिल्डिंग को भी वक्फ ने क्लेम किया था
केंद्रीय मंत्री रिजिजू ने कहा कि 2014 में हम सब चुनाव में थे। उससे पहले 2013 में कुछ कदम उठाए गए। जिन्हें एक नागरिक और सदस्य के रूप में आपके दिमाग में सवाल उठेगा कि ये कदम क्यों उठाया गया। पहला था कि कोई भले ही किसी धर्म का हो कि कोई भी वक्फ क्रिएट कर सकता है। शिया बोर्ड में शिया रहेंगे, सुन्नी में सुन्नी रहेंगे, ऐसा आपने प्रावधान किया था। एक प्रावधान आया था कि वक्फ बोर्ड का जो प्रावधान है, इस देश में कोई भी मौजूदा कानून है, यह (वक्फ) उसके ऊपर रहेगा। इस देश में ऐसा कानून कैसे मंजूर कर सकते हैं? 2013 में जो बिल पास हुआ, उस पर ताज्जुब हुआ। 1970 से दिल्ली में एक केस चल रहा था। दिल्ली की कई प्रॉपर्टी पर वक्फ ने दावा किया। इसमें पार्लियामेंट बिल्डिंग भी थी। 123 प्रॉपर्टी यूपीए सरकार ने वक्फ को दे दी थी। आज ये संशोधन नहीं लाते तो संसद की इमारत को भी क्लेम किया जा रहा था। यूपीए की सरकार जारी रहती तो क्या-क्या प्रॉपर्टी पर दावा किया गया था। सभी को डी-नोटिफाई कर दिया जाता।
रिजिजू बोले- जिससे लेना-देना नहीं, उसका जिक्र कर लोगों को बरगला रहे
केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि आजादी के बाद 1954 में वक्फ एक्ट पहली बार बना। उस समय स्टेट वक्फ बोर्ड का भी प्रावधान किया गया था। उस वक्त से कई संशोधनों के बाद 1995 में वक्फ एक्ट बना। उस वक्त किसी ने नहीं कहा कि ये गैरसंवैधानिक है। आज जब हम उसी बिल को सुधारकर ला रहे हैं तो आप कह रहे हैं कि यह गैरसंवैधानिक है। आप सबकुछ छोड़कर जिसका लेना-देना नहीं है, उसका जिक्र कर आप लोगों को बरगला रहे हैं।
रिजिजू ने श़ेर में कहा- जमीं का दर्द आसमां न समझे
किरेन रिजिजू ने कहा कि कई लीगल एक्सपर्ट, कम्युनिटी लीडर्स, धार्मिक लीडर्स और अन्य लोगों ने कमेटी के सामने अपने सुझाव रखे। पिछली बार जब हमने बिल पेश किया था, तब भी कई बातें बताई थीं। मुझे उम्मीद ही नहीं, यकीन है कि जो इसका विरोध कर रहे हैं, उनके हृदय में बदलाव होगा और वे बिल का समर्थन करेंगे। किसी ने कहा कि ये प्रावधान गैर संवैधानिक हैं। किसी ने कहा कि गैर-कानूनी है। यह नया विषय नहीं है। आजादी से पहले पहली बार बिल पास किया गया था। इससे पहले वक्फ को इनवैलिडेट (अवैध करार) किया था। 1923 में मुसलमान वक्फ एक्ट लाया गया था। ट्रांसपेरेंसी और एकाउंटिबिलिटी का आधार देते हुए एक्ट पारित किया गया था।
रिजिजू ने कहा- 284 डेलिगेशन ने कमेटी के सामने अपनी बात रखी
संसदीय कार्य और अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री किरेन रिजिजू ने- हम सबको बहुत डिटेल में जाने की कमेटी के बारे में कोई आवश्यकता नहीं है। इस बार कमेटी राज्यसभा और लोकसभा सांसदों को मिलाकर बनी है। आज तक संसदीय इतिहास में इतनी व्यापक चर्चा नहीं हुई और समय इतना कभी नहीं दिया गया। जो-जो सदस्य इस कमेटी में थे, उनको धन्यवाद देना चाहता हूं। 97 लाख 27 हजार के करीब याचिकाएं आईं। ये सुझाव, एप्लिकेशन और मेमोरेंडम के रूप में थीं। कभी भी इससे ज्यादा संख्या में किसी बिल पर लोगों की याचिकाएं नहीं आईं। 284 डेलिगेशन ने कमेटी के सामने अपनी बात रखी और सुझाव दिए।
बिरला बोले- छ्वक्कष्ट में व्यापक शक्तियां, वह बिल का प्रारूप बदल सकती है
स्पीकर ओम बिरला ने कहा- संयुक्त संसदीय समिति (छ्वक्कष्ट) के किसी भी विधेयक में संशोधन की शक्तियां व्यापक हैं। समिति किसी भी विधेयक में संशोधन कर सकती है या पूरी तरह प्रारूप बदल सकती है। पूरा नाम और संक्षिप्त नाम भी बदल सकती है। पहले भी ऐसा हो चुका है।