चैत्र नवरात्रि की शुरुआत आज से हो गई है। छत्तीसगढ़ में भी देवी मंदिरों में उत्साह के साथ श्रद्धालु दर्शन करने पहुंच रहे हैं। इस बार देवी मां गज पर सवार होकर आ रही है। ऐसे में इस नवरात्र को कई तरह से सुख समृद्धि व कई मायनों में लाभकारी मान रहे हैं।
पंडित धीरजकृष्ण शर्मा ने बताया कि, इस बार अमृत योग है और माता रानी गज (हाथी) पर सवार होकर आ रही हैं। चैत्र नवरात्रि में सर्वार्थ योग बन रहा है और पंचक समाप्त हो रहा है। इससे सुख समृद्धि और अतिवृष्टि साल भर रहेगी और यह साल भी अच्छा रहेगा।
मां महामाया 52 शक्ति पीठों में से एक है
बिलासपुर जिले के रतनपुर स्थित महामाया मंदिर महाकाली, महालक्ष्मी और महासरस्वती को समर्पित है। ये 52 शक्ति पीठों में से एक है। देवी महामाया को कोसलेश्वरी के रूप में भी जाना जाता है, जो पुराने दक्षिण कोसल क्षेत्र की अधिष्ठात्री देवी हैं।
- ज्योति कलश : इस बार करीब 31 हजार मनोकामना ज्योति कलश प्रज्ज्वलित किए जा रहे। इसमें 5 हजार ज्योति घी की होगी। देवभोग से 18 हजार लीटर घी मंगवाया गया है।
- कैसे जाएं : रतनपुर पहुंचने के लिए सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन करीब 25 किमी दूर बिलासपुर में है। उसके बाद आपको वहां से बस या टैक्सी-ऑटो से आना होगा। बिलासपुर सड़क और रेल मार्ग से देश के लगभग सभी बड़े स्टेशनों से जुड़ा हुआ है।
- क्या खास- हर आरती का लाइव प्रसारण भी किया जाएगा।
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मां बम्लेश्वरी देवी का विख्यात मंदिर आस्था का केंद्र
डोंगरगढ़ की पहाड़ी पर स्थित मां बम्लेश्वरी देवी का विख्यात मंदिर आस्था का केंद्र है। बड़ी बम्लेश्वरी के समतल पर स्थित मंदिर छोटी बम्लेश्वरी के नाम से प्रसिद्ध है। बम्लेश्वरी शक्ति पीठ का इतिहास करीब 2000 वर्ष पुराना है। इसे वैभवशाली कामाख्या नगरी के रूप में जाना जाता था।
मां बम्लेश्वरी को मध्य प्रदेश के उज्जयिनी के प्रतापी राजा विक्रमादित्य की कुलदेवी भी कहा जाता है। इतिहासकारों ने इस क्षेत्र को कल्चुरी काल का पाया है। मंदिर की अधिष्ठात्री देवी मां बगलामुखी हैं। उन्हें मां दुर्गा का स्वरूप माना जाता है। उन्हें यहां मां बम्लेश्वरी के रूप में पूजा जाता है।
- ज्योति कलश: पहाड़ के ऊपर 7500 और नीचे मंदिर में 900 आस्था के दीप जलाए जा रहे। छोटी माता मंदिर में 2100 रुपए और बड़ी माता मंदिर में 1100 रुपए में तेल के दीपक जलाए जा रहे। मंदिर में घी के दिये जलाने पर रोक लगाई गई है।
- श्रद्धालुओं के लिए व्यवस्था : मंदिर तक जाने के लिए सीढ़ियों के अलावा रोपवे की सुविधा भी है। ऊपर पेयजल की व्यवस्था, विश्रामालयों के अलावा भोजनालय और धार्मिक सामग्री खरीदने की सुविधा है। पहाड़ी के नीचे 24 घंटे भोजन, भंडारे की व्यवस्था।
- कैसे जाएं : रायपुर से 100, नागपुर से 190 किमी की दूरी पर स्थित है और मुंबई-हावड़ा रेल मार्ग के अंतर्गत आता है। सीधे ट्रेन और बस की सुविधा है।